हम नहीं अधूरे...
****************भीग कर भी भीगने का एहसास अधूरा सा लगता था,
पर अब ख़ुद में सिमट के भी हम पूरे हैं,
मत सोचना तुम ये कि हम आज भी अधूरे हैं ।।
आंखों में सपने फिर मचलने लगे हैं,
दिल में चाहत के फूल फिर से खिलने लगे हैं,
अब तुम्हारी याद में आंसू नहीं आते,
हम ख़ुद मेंं कुछ यूँ खिलने लगे हैं,
कोई तो है जो हमें चाहता है...
आज इस बारिश में उसके ख़ातिर पिघलने लगे हैं।
ख़ुदा ने बख़्शे हैं जो भी रंग ज़िन्दगी में,
आज हम ख़ुद को उन रंगों में रंगने लगे हैं......
अब तुम्हारे बिन अकेले हंस के चलने लगे हैं,
मत सोचना तुम ये कि हम आज भी अधूरे हैं,
क्योंकि ख़ुद में सिमट के भी हम पूरे हो गये हैं।। ---------- " सुन्दरम् "
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